What is Dividend. शेयर मार्केट में पैसा लगाने वाले शख्स को डिविडेंड की चाह जरूर होती है. हालांकि सभी कंपनियां अपने शेयर धारकों को डिविडेंड (Dividend) नहीं देती हैं. पहले तो समझ लेते हैं कि आखिर डिविडेंड होता क्या है. तो इसे हिंदी में लाभांश कहते हैं, यानी कोई भी कंपनी अगर अपने मुनाफे का निश्चित हिस्सा अपने शेयर धारकों को भी देती है तो इसे डिविडेंड कहा जाता है.
निवेशकों को तिमाही या सालाना आधार पर डिविडेंड दिया जाता है. आसान शब्दों में समझें तो कंपनी अपने शुद्ध लाभ (Net Profit) का जो हिस्सा शेयर धारकों को देती है, वो डिविडेंड कहलाता है. वहीं एक शेयर पर मिलने वाले डिविडेंड को ‘डिविडेंड पर शेयर’ (Dividend Per Share) कहते हैं. ये अमाउंट सीधे आपके बैंक अकाउंट में पहुंच जाता है.
डिविडेंड यील्ड
अक्सर आपने शेयर के बारे में रिसर्च करते वक्त डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) नाम का रेश्यो देखा होगा. कई लोग इस पैरामीटर के आधार पर भी शेयर खरीदते हैं. डिविडेंड यील्ड का मतलब है सालाना डिविडेंड/शेयर का मौजूदा भाव x 100. इसे एक उदाहरण से समझते हैं. अगर कंपनी ABC एक वित्त वर्ष में 10 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान करती है और शेयर का मौजूदा भाव 250 रुपये है, तो कंपनी का डिविडेंड यील्ड हुआ- 4%.
कैसे मिलता है डिविडेंड
ऐसा कोई नियम नहीं है कि हर कंपनी को डिविडेंड देना ही है. ये पूरी तरह से कंपनियों पर ही निर्भर करता है. हालांकि PSU सेक्टर (PSU Sector) की कंपनियां आमतौर पर डिविडेंड ज्यादा देती हैं. जो कंपनी अभी ग्रोथ फेज में है और तेजी से आगे बढ़ना चाहती है, वो मुनाफे को ग्रोथ प्रोजेक्ट्स पर ही खर्च करती है, जबकि मैच्योर हो चुके बिजनेस, डिविडेंड देना बेहतर समझते हैं.
अब अगर आपके शेयर के भाव भी बढ़ रहे हैं और डिविडेंड भी मिल रहा है तो निवेशक को दोहरा मुनाफा होता है. आपको डिविडेंड लेने के लिए ऐसी कंपनियों में निवेश करना होगा जो अक्सर अपने निवेशकों को लाभ में हिस्सा देती हैं.
देश में सबसे ज्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनियों में से कुछ हैं- कोल इंडिया, REC, ONGC, ITC, ऑयल इंडिया, IOC, वेदांता, PFC.
कई बार निवेशक डिविडेंड यील्ड वाली कंपनियों में इसलिए निवेश करते हैं कि अगर शेयर का प्राइस नहीं भी बढ़ा तो उन्हें कम से कम डिविडेंड का फायदा मिलेगा. अगर डिविडेंड ज्यादा है तो वो FD के मुकाबले ज्यादा रिटर्न भी कमा सकते हैं. हालांकि ज्यादा डिविडेंड का फायदा लेने के लिए शेयर भी ज्यादा होने चाहिए.